नई दिल्ली: यूपीआई लेनदेन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान मुफ्त बना रहेगा। लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित होने के बाद यह सवाल उठ रहा था कि क्या अब यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि उपयोगकर्ताओं से यूपीआई भुगतान के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेनदेन भी मुफ्त रहेंगे।
मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क को लेकर क्या है प्रावधान
सरकार के मुताबिक, यदि भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है तो यह सभी यूपीआई लेनदेन पर नहीं लगाया जाएगा। यह केवल तय सीमा से अधिक वाले मर्चेंट लेनदेन की सीमित श्रेणी पर लागू हो सकता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में शुल्क की दर कम रखी जाएगी और यह डेबिट तथा क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर लागू मर्चेंट डिस्काउंट रेट की तुलना में काफी कम होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कारोबारियों के साथ किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.25 से 0.4 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की अनुमति दिए जाने की संभावना है। हालांकि, यह व्यवस्था लागू होने की स्थिति में भी रोजमर्रा के छोटे भुगतान इससे प्रभावित होने की उम्मीद नहीं है।
दूध, सब्जी और किराने के भुगतान पर नहीं पड़ेगा असर
सरकार के स्पष्टीकरण के मुताबिक, दूध, सब्जी, किराने का सामान, ऑटो-रिक्शा की सवारी और टैक्सी किराए जैसे रोजमर्रा के भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की उम्मीद नहीं है। ज्यादातर मर्चेंट लेनदेन भी मुफ्त बने रहने की बात कही गई है।
यदि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है तो इसे सभी लेनदेन पर लागू करने के बजाय एक तय सीमा के आधार पर सीमित श्रेणी में लागू किया जाएगा।
किसे और कब लग सकता है शुल्क
यूपीआई और सेवाओं से जुड़ी संचालन समिति यह तय करेगी कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जाना चाहिए या नहीं। यह फैसला संसद द्वारा टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित किए जाने के बाद ही लिया जाएगा। इस विधेयक में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10ए में बदलाव का प्रस्ताव है।
सरकार के अनुसार, यूपीआई लेनदेन की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और भुगतान से जुड़े बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश की जरूरत बढ़ रही है।
UPI को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर
सरकार ने कहा है कि भारत डिजिटल भुगतान के विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। ऐसे में यूपीआई व्यवस्था को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और कम लागत वाला बनाए रखना जरूरी है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यूपीआई का विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लगातार हो रहा है।
अफवाहों पर सरकार ने दिया स्पष्टीकरण
पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में प्रस्तावित संशोधन को लेकर सरकार ने कहा कि हालिया बदलावों को कुछ लोगों ने गलत तरीके से आम उपयोगकर्ताओं पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव के रूप में समझ लिया। सरकार के अनुसार, यह संशोधन एक सक्षम प्रावधान है, जिसका उद्देश्य यूपीआई की लंबे समय तक संचालन क्षमता को बनाए रखना है।
सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रावधान के जरिए यूपीआई की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और उभरते जोखिमों से निपटने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। फिलहाल सरकार का स्पष्ट कहना है कि आम उपयोगकर्ताओं के लिए यूपीआई लेनदेन मुफ्त बने रहेंगे।
